सोच का जाल
ख़ुद को कम आँकना: यह क्या है, रोज़मर्रा के उदाहरणों के साथ
- ख़ुद को कम आँकना
- अपनी ख़ूबियों और मेहनत को छोटा करके देखना।
यह किसी ग़लती को बढ़ा-चढ़ाकर देखने का उल्टा रूप है: जो आपने अच्छा किया, उसे छोटा कर दिया जाता है, तो वह कभी जुड़कर कुछ बनता ही नहीं। दूसरों की मेहनत को अक्सर अपनी मेहनत से ज़्यादा श्रेय मिलता है।
रोज़मर्रा के उदाहरण
- दफ़्तर में
“यह तो कोई भी कर लेता।”
- घर पर
“आज मुझसे बस बर्तन ही धुल पाए।”
- अपने बारे में
“मुश्किल हफ़्ता निकल तो गया, पर यह तो हर बड़ा करता है।”
विचार को जाँचने के सवाल
ThinkGO के सुकराती प्रश्नों से। एक या दो चुन लें; सबकी ज़रूरत नहीं है।
- अगर किसी दोस्त के मन में यह विचार हो, तो आप उससे क्या कहेंगे?
- किन बातों से लगता है कि यह विचार सच है? किन बातों से लगता है कि नहीं?
- क्या जो हुआ उसे देखने का कोई और तरीका है?
एक ज़्यादा निष्पक्ष विकल्प
जाल
“यह तो कोई भी कर लेता।”
ज़्यादा निष्पक्ष विचार
“यह मैंने किया, और इसमें मेहनत लगी। यह मायने रखता है।”
मददगार अभ्यास
जुड़े हुए सोच के जाल
स्रोत
- Beck, A. T. (1976). Cognitive Therapy and the Emotional Disorders. International Universities Press.
- Burns, D. D. (1980). Feeling Good: The New Mood Therapy. William Morrow.
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