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सोच का जाल

ठप्पा लगाना: यह क्या है, रोज़मर्रा के उदाहरणों के साथ

अपडेट किया गया: 5 नवंबर 2026

ठप्पा लगाना
किसी एक काम के बजाय पूरे इंसान पर ठप्पा लगाना।

एक काम पहचान बन जाता है: आपसे ग़लती हुई, तो आप “बेवकूफ़” हैं; कोई देर से आया, तो वह “मतलबी” है। एक शब्द पूरे, मिले-जुले इंसान की जगह ले लेता है।

रोज़मर्रा के उदाहरण

  • अपने बारे में

    “मैं एक नाकाम इंसान हूँ।”

  • दफ़्तर में

    “मीटिंग मेरे दिमाग़ से निकल गई। मैं एक बेकार इंसान हूँ।”

  • दूसरों के बारे में

    “उसने फिर से प्लान रद्द कर दिया। कितनी मतलबी है।”

विचार को जाँचने के सवाल

ThinkGO के सुकराती प्रश्नों से। एक या दो चुन लें; सबकी ज़रूरत नहीं है।

  1. अगर किसी दोस्त के मन में यह विचार हो, तो आप उससे क्या कहेंगे?
  2. क्या यह एक तथ्य है, या ऐसा विचार जो तथ्य जैसा लगता है?
  3. किन बातों से लगता है कि यह विचार सच है? किन बातों से लगता है कि नहीं?

एक ज़्यादा निष्पक्ष विकल्प

जाल

“मीटिंग मेरे दिमाग़ से निकल गई। मैं एक बेकार इंसान हूँ।”

ज़्यादा निष्पक्ष विचार

“एक मीटिंग दिमाग़ से निकल गई। मुझे रिमाइंडर लगाना है और माफ़ी माँगनी है। इससे यह तय नहीं होता कि मैं कौन हूँ।”

मददगार अभ्यास

स्रोत

  • Beck, A. T. (1976). Cognitive Therapy and the Emotional Disorders. International Universities Press.
  • Burns, D. D. (1980). Feeling Good: The New Mood Therapy. William Morrow.

पढ़ने के लिए पृष्ठभूमि सामग्री। इस पेज की परिभाषाएँ, उदाहरण और सवाल हमारे अपने शब्दों में हैं।